छत्तीसगढ़ के किसी बड़े शहर का नाम किसी राजा या देवता के नाम पर न होकर एक मछुआरिन के नाम पर हो — यह अपने आप में असामान्य है। बिलासपुर जिला का नाम बिलासा नाम की उसी महिला से जुड़ा है। आज यही शहर छत्तीसगढ़ की न्यायधानी है, जहाँ प्रदेश का उच्च न्यायालय स्थित है।
पर बिलासपुर की कहानी अदालत और रेलवे से बहुत पीछे शुरू होती है — मल्हार से, जो पहली सहस्राब्दी में एक बड़ा नगर और राजधानी था। इस लेख में बिलासपुर का नाम, इतिहास, भूगोल, समाज और आज की पहचान — सब क्रम से।
बिलासपुर जिला — एक नज़र में
| क्षेत्रफल | 3,475.61 वर्ग किमी |
| जनसंख्या (2011) | 16,28,202 |
| शहरी जनसंख्या | 5,82,146 — 35.81% |
| साक्षरता दर | 74.46% |
| लिंग अनुपात | 970 (बाल लिंग अनुपात 951) |
| जनसंख्या घनत्व | 463 प्रति वर्ग किमी |
| प्रमुख नदी | अरपा (लगभग 100 किमी लंबी) |
| जिला गठन | वर्ष 1861 |
| पहचान | न्यायधानी — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय यहीं |
बिलासा — जिसके नाम पर शहर बसा
जिला प्रशासन के अनुसार “बिलासपुर” नाम बिलासा नामक एक मछुआरिन के नाम पर पड़ा। बिलासपुर शहर लगभग 400 वर्ष पुराना माना जाता है।
यह नाम आज भी जीवित है — बिलासपुर का हवाई अड्डा बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट कहलाता है। चकरभाठा स्थित यह हवाई अड्डा 1942 में रॉयल इंडियन एयर फोर्स द्वारा बनाया गया था, जो इसे छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना हवाई अड्डा बनाता है।
इतिहास — रतनपुर के कलचुरियों से 1861 तक
ऐतिहासिक रूप से बिलासपुर क्षेत्र रतनपुर के कलचुरी राजवंश के नियंत्रण में रहा। रतनपुर आज भी बिलासपुर जिले में ही है और लंबे समय तक इस पूरे अंचल की राजधानी रहा।
बिलासपुर शहर स्वयं मराठा शासनकाल में लगभग 1741 के आसपास प्रमुखता में आया। अंग्रेज़ी शासन के दौर में 1861 में बिलासपुर जिले का गठन हुआ और उसके छह साल बाद 1867 में बिलासपुर नगर पालिका बनी।
मल्हार — पहली सहस्राब्दी की राजधानी
बिलासपुर जिले का सबसे कम चर्चित पर सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल मल्हार है। आज यह एक गाँव जैसा कस्बा है, लेकिन पहली सहस्राब्दी में यह एक बड़ा नगर और राजधानी था। शिलालेखों और साहित्य में इसे मल्लार, मल्लारी और शरभपुर नामों से उल्लेखित किया गया है।
यहाँ प्राचीन किले के टीले और अवशेष, दो पुनर्निर्मित शिव मंदिर, तथा एक संग्रहालय है जिसमें हिंदू, जैन और बौद्ध — तीनों परंपराओं के मंदिरों के अवशेष संरक्षित हैं। एक ही स्थान पर तीन धार्मिक परंपराओं के अवशेष मिलना मल्हार को विशेष बनाता है।
भूगोल — अरपा और वर्षा का गणित
बिलासपुर जिला 21.47° से 23.8° उत्तरी अक्षांश और 81.14° से 83.15° पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। जिले की प्रमुख नदी अरपा है, जिसका उद्गम पेंड्रा उप-खंड के खोंड्री-खोंगसरा से होता है। लगभग 100 किलोमीटर लंबी अरपा जिले की सबसे बड़ी नदी है। अन्य प्रमुख नदियाँ लीलागर और मनियारी हैं।
जलवायु उप-उष्णकटिबंधीय, अर्धशुष्क, महाद्वीपीय और मानसूनी है। गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है और धूल भरी आँधियाँ आम हैं।
यहाँ एक महत्वपूर्ण बात ध्यान देने योग्य है — जिले की वार्षिक वर्षा लगभग 58 सेंटीमीटर है, जिसका करीब 80 प्रतिशत जुलाई से सितंबर के बीच बरसता है। वर्षा कम होने और उसकी अवधि छोटी होने के कारण यहाँ की खेती मुख्यतः नहर सिंचाई और ट्यूबवेल पर निर्भर है — यानी बिलासपुर की कृषि बारिश से ज़्यादा सिंचाई प्रबंधन पर टिकी है।
समाज — तीनों बड़े जिलों में सबसे कम शहरी
बिलासपुर छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, फिर भी जिले की केवल 35.81% आबादी शहरी है। यह रायपुर (59.08%) और दुर्ग (64.16%) से काफ़ी कम है — यानी बड़े शहर के बावजूद जिला मूलतः ग्रामीण बना हुआ है।
| अनुसूचित जाति | 3,37,420 — 20.76% |
| अनुसूचित जनजाति | 2,33,615 — 14.37% |
| घरों की संख्या | 3,55,376 |
| कार्य भागीदारी दर | 42.34 |
दोनों आँकड़े ध्यान खींचते हैं। अनुसूचित जाति की आबादी 20.76% है — रायपुर और दुर्ग दोनों से अधिक। और अनुसूचित जनजाति की आबादी 14.37% है, जो रायपुर (4.30%) की तुलना में तीन गुना से भी ज़्यादा है। इसकी वजह भौगोलिक है — जिले का उत्तरी हिस्सा वन और पहाड़ी क्षेत्र की ओर बढ़ता है।
न्यायधानी, रेल और विश्वविद्यालय
आज बिलासपुर की पहचान तीन संस्थानों से बनती है —
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय — इसी कारण बिलासपुर को “न्यायधानी” कहा जाता है
- रेलवे ज़ोन मुख्यालय — बिलासपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का ज़ोनल मुख्यालय है
- गुरु घासीदास विश्वविद्यालय — 16 जून 1983 को स्थापित, जो 2009 के केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय बना
इनके अलावा एसईसीएल और एनटीपीसी जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान भी बिलासपुर से जुड़े हैं। एक ही शहर में उच्च न्यायालय, रेलवे ज़ोन मुख्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय — यह संयोजन छत्तीसगढ़ में और कहीं नहीं है।
कोसा और धान — जिले की पुरानी पहचान
जिला प्रशासन के अनुसार बिलासपुर चावल की गुणवत्ता, कोसा उद्योग और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के कारण न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में जाना जाता है। पूरे छत्तीसगढ़ के लिए बिलासपुर जिले को “धान का कटोरा” कहा जाता रहा है।
कोसा — जंगली रेशम — छत्तीसगढ़ की विशिष्ट हस्तकला परंपरा है, और बिलासपुर इसका पुराना केंद्र रहा है।
बिलासपुर से जुड़ी हस्तियाँ
डॉ. ई. राघवेंद्र राव (1889–1942)
वकील, राजनेता और स्वतंत्रता सेनानी। जन्म नागपुर के कामठी में हुआ और परिवार बाद में रायपुर-बिलासपुर आ गया। इंग्लैंड से बैरिस्टर बनकर लौटने के बाद उन्होंने 1914 में बिलासपुर से वकालत शुरू की। वे 1921 से 1926 तक केंद्रीय विधान सभा के सदस्य रहे और मध्य प्रांत एवं बरार में शिक्षा मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
बिलासा देवी केवट
जिस मछुआरिन के नाम पर शहर बसा, वह आज भी जिले की सामूहिक स्मृति का हिस्सा है। बिलासपुर का हवाई अड्डा उन्हीं के नाम पर बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट है — किसी भारतीय हवाई अड्डे का नाम किसी मछुआरिन के नाम पर होना अपने आप में उल्लेखनीय है।
प्रशासनिक ढाँचा
| तहसील | 11 |
| विकासखंड (ब्लॉक) | 4 |
| नगर निगम | 1 |
| नगर पालिका परिषद | 2 |
| नगर पंचायत | 4 |
| ग्राम पंचायत | 483 |
| गाँव | 708 |
घूमने और देखने की जगहें
- मल्हार — प्राचीन किले के अवशेष, शिव मंदिर और पुरातात्विक संग्रहालय
- रतनपुर — कलचुरी राजधानी और महामाया मंदिर
- अरपा नदी तट
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय परिसर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिलासपुर नाम कैसे पड़ा?
जिला प्रशासन के अनुसार बिलासा नामक एक मछुआरिन के नाम पर।
बिलासपुर जिला कब बना?
वर्ष 1861 में; नगर पालिका 1867 में बनी।
बिलासपुर को न्यायधानी क्यों कहते हैं?
क्योंकि छत्तीसगढ़ का उच्च न्यायालय यहीं स्थित है।
जिले की प्रमुख नदी कौन-सी है?
अरपा, जो लगभग 100 किमी लंबी है। लीलागर और मनियारी भी प्रमुख नदियाँ हैं।
मल्हार क्यों महत्वपूर्ण है?
पहली सहस्राब्दी में यह एक बड़ा नगर और राजधानी था, जिसे शिलालेखों में शरभपुर भी कहा गया है।
महत्वपूर्ण लिंक
| जिला बिलासपुर — इतिहास | यहाँ देखें |
| जिला बिलासपुर — जनसांख्यिकी | यहाँ देखें |
| जिला बिलासपुर — भूगोल और जलवायु | यहाँ देखें |
यह भी पढ़ें
- रतनपुर और कलचुरी राजवंश: छत्तीसगढ़ नाम की जड़ यहीं है
- रायपुर जिला: इतिहास, भूगोल, संस्कृति और वे लोग जिन्होंने इसे पहचान दी
- दुर्ग जिला: भिलाई की धरती और चार बँटवारों का इतिहास
स्रोत: जिला बिलासपुर की आधिकारिक वेबसाइट (इतिहास, जनसांख्यिकी तथा भूगोल एवं जलवायु पृष्ठ)। जनसंख्या एवं सामाजिक आँकड़े जनगणना 2011 पर आधारित। मल्हार, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय एवं हस्तियों से जुड़े विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं।
फ़ीचर्ड चित्र: “Deul Temple, Malhar, Bilaspur, Chattisgarh” — SpeakingArch, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0. मूल चित्र यहाँ; आकार बदलकर उपयोग किया गया है।





