रायपुर जिला: इतिहास, भूगोल, संस्कृति और वे लोग जिन्होंने इसे पहचान दी

जय स्तंभ चौक, रायपुर — वह स्थल जहाँ 1857 में वीर नारायण सिंह को फाँसी दी गई थी

खारून नदी के किनारे बसा रायपुर जिला आज छत्तीसगढ़ की राजधानी है — पर इस शहर की कहानी छह सौ साल से भी पुरानी है। कभी यह दक्षिण कोसल का हिस्सा था, फिर कलचुरी राजाओं की रियासत, फिर अंग्रेज़ी शासन का मुख्यालय, और 1857 में वह जगह जहाँ छत्तीसगढ़ के पहले स्वतंत्रता सेनानी को फाँसी दी गई।

इस लेख में रायपुर जिले का भूगोल, इतिहास, प्रशासनिक ढाँचा, संस्कृति और उन लोगों की कहानी है जिन्होंने इस ज़मीन से निकलकर इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।

रायपुर जिला — एक नज़र में

राज्य में स्थिति छत्तीसगढ़ की राजधानी, प्रदेश के मध्य में
क्षेत्रफल 2,891.98 वर्ग किमी
समुद्र तल से ऊँचाई 244 से 409 मीटर
जनसंख्या (2011) 21,60,876 — ग्रामीण 8,84,224 · शहरी 12,76,652
साक्षरता 80.52% (पुरुष 87.97%, महिला 72.79%)
प्रमुख नदियाँ महानदी, खारून
औसत वर्षा 1,370 मिमी
तापमान अधिकतम 44.3°C · न्यूनतम 12.5°C
सीमावर्ती जिले दुर्ग, बेमेतरा, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, धमतरी

भूगोल — नदियाँ, मिट्टी और मैदान

रायपुर जिले में मुख्यतः दो नदियाँ बहती हैं। महानदी छत्तीसगढ़ की सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जिसका उद्गम धमतरी जिले की नगरी-सिहावा तहसील में स्थित श्रृंगी पर्वत से होता है। खारून रायपुर और दुर्ग जिलों में बहती है और इसका उद्गम दुर्ग जिले की पेटेचुवा पहाड़ी से हुआ है। रायपुर की कई पुरानी बस्तियाँ और मंदिर खारून के किनारे ही बसे हैं।

जिले का बड़ा हिस्सा मैदानी है — धरसीवा, आरंग, अभनपुर और तिल्दा इसी मैदान में आते हैं। यहाँ की मिट्टी में कन्हार, डोरसा, मटासी, कछार और भाठा शामिल हैं, जिनका pH औसतन 6.5 से 7.5 रहता है। यही कारण है कि राजधानी होने के बावजूद जिले का बड़ा हिस्सा आज भी खेती पर निर्भर है।

इतिहास — दक्षिण कोसल से राजधानी तक

रायपुर का क्षेत्र प्राचीन काल में दक्षिण कोसल का हिस्सा था और मौर्य साम्राज्य के अंतर्गत माना जाता है। दूसरी-तीसरी शताब्दी में यहाँ सातवाहन शासकों का शासन रहा। चौथी शताब्दी ईस्वी में समुद्रगुप्त ने इस क्षेत्र पर अधिकार किया, और पाँचवीं-छठी शताब्दी तक यह भाग सरभपुरीय राजाओं के अधीन आ गया। बीच में कुछ समय के लिए नल राजाओं का भी प्रभुत्व रहा।

इसके बाद सोमवंशी शासकों का दौर आया। इसी वंश से जुड़ी एक इमारत आज भी खड़ी है — सोमवंश के हर्षगुप्त की विधवा रानी वासटा ने राजिम में ईंटों से बना प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर बनवाया।

आगे चलकर तुमान के कलचुरी राजाओं ने लंबे समय तक शासन किया और रतनपुर को राजधानी बनाया। रतनपुर, राजिम और खल्लारी में मिले प्राचीन शिलालेखों में कलचुरी शासनकाल का उल्लेख मिलता है।

“रायपुर” नाम कैसे पड़ा

नाम को लेकर दो कहानियाँ प्रचलित हैं। एक के अनुसार कलचुरी वंश के राजा रामचंद्र ने रायपुर बसाया और बाद में इसे अपनी राजधानी बनाया। दूसरी कहानी के अनुसार उनके पुत्र ब्रह्मदेव राय ने रायपुर की स्थापना की — उनकी राजधानी खलवाटिका (आज की खल्लारी) थी, और नए नगर का नाम उन्हीं के नाम पर “रायपुर” रखा गया। यह लगभग 1402 ई. की बात मानी जाती है। इसी दौर में खारून के तट पर हजराज नायक ने हटकेश्वर महादेव मंदिर बनवाया।

राजा अमरसिंह देव की मृत्यु के साथ इस वंश का शासन समाप्त हुआ और क्षेत्र नागपुर के भोंसले राजाओं के अधीन चला गया। रघुजी तृतीय की मृत्यु के बाद अंग्रेज़ सरकार ने यह क्षेत्र ले लिया, और 1854 में छत्तीसगढ़ को रायपुर मुख्यालय के साथ अलग इकाई घोषित किया गया। स्वतंत्रता के बाद रायपुर जिला मध्य प्रांत एवं बरार में शामिल हुआ।

जिला तीन बार बँटा

आज का रायपुर जिला पहले कहीं बड़ा था। 1998 में इसे बाँटकर महासमुंद और धमतरी जिले बनाए गए। फिर 2011 में रायपुर से दो और जिले निकले — बलौदाबाजार-भाटापारा और गरियाबंद। इसीलिए पुराने दस्तावेज़ों में रायपुर का क्षेत्रफल और सीमाएँ आज से अलग मिलती हैं।

रायपुर के वे लोग जिन्होंने इतिहास बदला

1857 की क्रांति में छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी कहानी रायपुर से जुड़ी है।

शहीद वीर नारायण सिंह (1795–1857)

सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह को छत्तीसगढ़ का पहला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माना जाता है। अकाल के समय उन्होंने अनाज के गोदाम खुलवाकर गरीबों में बँटवा दिए, इसलिए वे “गरीबों के मसीहा” कहलाए। 1857 की क्रांति के समय वे जेल से निकलकर अंग्रेज़ों से लड़े और पकड़े गए। 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जय स्तंभ चौक पर उन्हें फाँसी दे दी गई। आज रायपुर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम उन्हीं के नाम पर है।

ठाकुर हनुमान सिंह — “छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे”

उस समय रायपुर में अंग्रेज़ों की फौजी छावनी थी, जिसे तृतीय रेगुलर रेजीमेंट कहा जाता था। ठाकुर हनुमान सिंह इसी फौज में मैग्ज़ीन लश्कर के पद पर थे। 18 जनवरी 1858 को उन्होंने सार्जेंट मेजर सिडवेल को मार डाला और विद्रोह का बिगुल फूँका — इसीलिए उन्हें “छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे” कहा जाता है।

पं. सुंदरलाल शर्मा (1881–1940)

“छत्तीसगढ़ का गांधी” कहे जाने वाले पं. सुंदरलाल शर्मा कवि, इतिहासकार, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी थे। 1920 में धमतरी के पास कंडेल नहर सत्याग्रह उन्हीं के नेतृत्व में सफल हुआ। उनके प्रयासों से ही महात्मा गांधी 20 दिसंबर 1920 को पहली बार रायपुर आए। असहयोग आंदोलन में छत्तीसगढ़ से जेल जाने वालों में वे प्रमुख थे।

ठाकुर प्यारेलाल सिंह (1891–1954)

छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन और सहकारिता आंदोलन के प्रणेता। जन्म राजनांदगांव जिले के दैहान गाँव में हुआ, शिक्षा राजनांदगांव और रायपुर में हुई, और उनका सार्वजनिक जीवन इसी क्षेत्र से जुड़ा रहा।

पं. रविशंकर शुक्ल (1877–1956)

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा रायपुर हाई स्कूल से पूरी की। आगे चलकर वे सीपी और बरार के पहले मुख्यमंत्री बने, और 1 नवंबर 1956 को बने नए राज्य मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री भी।

माधवराव सप्रे (1871–1926)

हिंदी के पहले कहानीकार माने जाने वाले सप्रे जी पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। जन्म दमोह जिले के पथरिया गाँव में हुआ, पर मैट्रिक उन्होंने शासकीय विद्यालय, रायपुर से उत्तीर्ण किया। देशभक्ति के कारण उन्होंने अंग्रेज़ों की सरकारी नौकरी छोड़ दी थी।

संस्कृति, त्योहार और लोकजीवन

जिले की बोलचाल की भाषा छत्तीसगढ़ी है। लोकजीवन में संगीत और नृत्य गहराई से रचे-बसे हैं — राउत नाचा, देवार नाचा, पंथी, सुआ और पंडवानी। पंडवानी महाभारत की कथा गाने की विशिष्ट शैली है, जिसे तीजन बाई जैसी कलाकारों ने देश-दुनिया तक पहुँचाया।

प्रमुख त्योहारों में हरेली, पोला, तीजा और गौरी-गौरा शामिल हैं। सावन में मनाया जाने वाला हरेली हरियाली का पर्व है — इस दिन किसान अपने कृषि औज़ारों और गायों की पूजा करते हैं, खेतों में भेलवा की टहनियाँ लगाते हैं और अच्छी फसल की प्रार्थना करते हैं। मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए घरों के मुख्य द्वार पर नीम की टहनियाँ भी लटकाई जाती हैं।

हरेली से पोला तक बच्चे गेड़ी (बाँस पर चलना) खेलते हैं — यह छत्तीसगढ़ की सबसे पहचानी परंपराओं में से एक है। महिलाओं के पारंपरिक गहनों में बाँधा, सुता, फुली, बाली, ऐंठी, पट्टा, करधनी और बिछिया शामिल हैं।

समाज और समुदाय

रायपुर छत्तीसगढ़ का मैदानी और सबसे शहरी जिला है, और इसकी सामाजिक बनावट बस्तर या सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल जिलों से काफ़ी अलग है। जनगणना 2011 के अनुसार जिले की 59.08% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है — पूरे प्रदेश में यह अनुपात सबसे ऊँचा है।

अनुसूचित जाति (SC) 16.60%
अनुसूचित जनजाति (ST) 4.30%
लिंगानुपात 983 महिलाएँ प्रति 1000 पुरुष
जनसंख्या घनत्व लगभग 750 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
दशकीय वृद्धि (2001–2011) 34.65%

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि रायपुर में अनुसूचित जाति की आबादी अनुसूचित जनजाति से लगभग चार गुना है — यह छत्तीसगढ़ के दक्षिणी और उत्तरी जिलों से बिल्कुल उलट तस्वीर है, जहाँ जनजातीय आबादी बहुसंख्यक है। इसका कारण भौगोलिक है: रायपुर मैदानी क्षेत्र है, जबकि जनजातीय समुदाय मुख्यतः वन और पहाड़ी अंचलों में केंद्रित रहे हैं। प्रदेश स्तर पर गोंड सबसे बड़ा जनजातीय समुदाय है, और कँवर, हलबा, बिंझवार जैसे समुदाय भी छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान का हिस्सा हैं।

भाषाएँ

जनगणना 2011 के अनुसार जिले में बोली जाने वाली भाषाएँ —

छत्तीसगढ़ी 61.77%
हिंदी 25.16%
ओड़िया 3.21%
सिंधी 1.94%

ओड़िया और सिंधी बोलने वालों की उपस्थिति रायपुर के व्यापारिक इतिहास और विभाजन के बाद हुए पुनर्वास — दोनों की याद दिलाती है।

प्रशासनिक ढाँचा

तहसील (8) रायपुर, तिल्दा, आरंग, अभनपुर, खरोरा, गोबरा नवापारा, धरसीवा, मंदिर हसौद
विकासखंड (4) धरसीवा, तिल्दा, आरंग, अभनपुर
जनपद पंचायत (4) धरसीवा, तिल्दा, आरंग, अभनपुर
नगर निगम (2) रायपुर, बिरगांव
नगर पालिका (3) तिल्दा-नेवरा, गोबरा नवापारा, आरंग
नगर पंचायत (7) खरोरा, कुर्रा, माना, अभनपुर, चंदखुरी, मंदिर हसौद, समोदा
ग्राम पंचायत 408
राजस्व ग्राम 545
पुलिस स्टेशन 32

नवा रायपुर अटल नगर

रायपुर की सबसे बड़ी आधुनिक पहचान नवा रायपुर अटल नगर है — नियोजित तरीके से बसाई गई नई राजधानी, जहाँ छत्तीसगढ़ विधानसभा और मंत्रालय सहित प्रमुख शासकीय भवन हैं। पुराने रायपुर की भीड़ से अलग, यह क्षेत्र चौड़ी सड़कों और सेक्टरों में बँटी योजनाबद्ध बसाहट के रूप में विकसित हुआ है।

आज का रायपुर — राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान

बीते दो दशकों में रायपुर एक प्रशासनिक मुख्यालय से आगे बढ़कर मध्य भारत के शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग केंद्र के रूप में उभरा है।

राष्ट्रीय महत्व के संस्थान

रायपुर की सबसे मजबूत आधुनिक पहचान यहाँ मौजूद राष्ट्रीय संस्थानों की शृंखला है —

  • एम्स रायपुर (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान)
  • आईआईएम रायपुर (भारतीय प्रबंध संस्थान)
  • एनआईटी रायपुर (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान)
  • आईआईआईटी नवा रायपुर (अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान)
  • हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU)
  • निफ्ट रायपुर (राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान)
  • सिपेट रायपुर

चिकित्सा, प्रबंधन, अभियांत्रिकी, विधि और फैशन — पाँचों क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर के संस्थान एक ही शहर में होना छत्तीसगढ़ में कहीं और नहीं है। यही वजह है कि रायपुर को प्रदेश का एजुकेशनल हब कहा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट

शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम देश के बड़े स्टेडियमों में गिना जाता है और यहाँ अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित होते हैं। जब भी रायपुर में कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होता है, शहर का नाम दुनिया भर के दर्शकों तक पहुँचता है — और यह नाम उसी वीर नारायण सिंह का है जिन्हें 1857 में यहीं फाँसी दी गई थी।

उद्योग और निवेश

रायपुर मध्य भारत की इस्पात एवं स्टील ट्रेडिंग गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। जिले में पचास से अधिक बड़े और मझोले उद्योग कार्यरत हैं, और जेएसडब्ल्यू स्टील तथा ग्रासिम जैसी कंपनियों की इकाइयाँ यहाँ मौजूद हैं। नवा रायपुर में नई विनिर्माण एवं तकनीकी इकाइयों के प्रस्ताव लगातार आते रहे हैं।

हवाई और डिजिटल संपर्क

स्वामी विवेकानंद विमानतल (माना) रायपुर को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ता है। नवा रायपुर को नियोजित स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ चौड़ी सड़कें, सेक्टर आधारित बसाहट और केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र (CBD) शामिल हैं।

घूमने और देखने की जगहें

  • स्वामी विवेकानंद सरोवर (बूढ़ा तालाब) — शहर के बीचोंबीच ऐतिहासिक तालाब
  • महंत घासीदास संग्रहालय — पुरातात्विक संग्रह
  • हटकेश्वर महादेव मंदिर — खारून नदी के तट पर
  • जय स्तंभ चौक — वीर नारायण सिंह की शहादत से जुड़ा स्थल
  • शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम
  • छत्तीसगढ़ विधानसभा, नवा रायपुर

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रायपुर जिले का क्षेत्रफल कितना है?
2,891.98 वर्ग किमी।

रायपुर में कौन-सी नदियाँ बहती हैं?
मुख्यतः महानदी और खारून।

रायपुर नाम किसके नाम पर पड़ा?
प्रचलित मत के अनुसार राजा ब्रह्मदेव राय के नाम पर, लगभग 1402 ई. में।

वीर नारायण सिंह को फाँसी कहाँ दी गई थी?
10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जय स्तंभ चौक पर।

रायपुर से कौन-से जिले बने?
1998 में महासमुंद और धमतरी, तथा 2011 में बलौदाबाजार-भाटापारा और गरियाबंद।

महत्वपूर्ण लिंक

जिला रायपुर — जिले के बारे में यहाँ देखें
जिला रायपुर — जिला एक नज़र में यहाँ देखें
जिला रायपुर — इतिहास यहाँ देखें
जिला रायपुर — संस्कृति यहाँ देखें

यह भी पढ़ें

स्रोत: जिला रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट (जिले के बारे में, जिला एक नज़र में, इतिहास एवं संस्कृति पृष्ठ)। जनसंख्या एवं साक्षरता के आँकड़े जनगणना 2011 पर आधारित। स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विवरण सार्वजनिक ऐतिहासिक स्रोतों पर आधारित हैं।

फ़ीचर्ड चित्र: “Jaistambh Chowk, Raipur 2018” — VishuN, विकिमीडिया कॉमन्स, CC BY-SA 4.0. मूल चित्र यहाँ; आकार बदलकर उपयोग किया गया है।