पगडंडी से पक्की सड़क तक पहुंचा अबुझमाड़: पीएम जनमन से झारावाही-हत्लानार 3.2 किमी सड़क तैयार

अबुझमाड़ में पीएम जनमन के तहत बनी झारावाही-हत्लानार 3.2 किमी पक्की सड़क

रायपुर, 13 अगस्त 2026। कभी दुर्गम पहाड़ियों, घने जंगलों और नक्सल खौफ के बीच संकरी पगडंडियों तक सिमटा अबुझमाड़ अब विकास की मुख्यधारा से जुड़कर बदलाव की नई इबारत लिख रहा है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत नारायणपुर जिले में झारावाही से हत्लानार तक 3.200 किलोमीटर लंबी सर्वकालिक पक्की सड़क का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है।

परियोजना एक नज़र में

स्थान अबुझमाड़, नारायणपुर जिला, छत्तीसगढ़
मार्ग झारावाही से हत्लानार
लंबाई 3.200 किलोमीटर (सर्वकालिक पक्की सड़क)
स्वीकृत लागत ₹299.60 लाख
वित्तीय वर्ष 2023-24
क्रियान्वयन एजेंसी छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण
योजना पीएम जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान)

जहाँ निर्माण की कल्पना भी चुनौती थी

नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अबुझमाड़ में कभी बुनियादी निर्माण कार्यों की कल्पना भी एक बड़ी चुनौती थी। अब इस पक्की सड़क के बनने से वर्षों से कटे हुए अंदरूनी गाँवों को मुख्य मार्ग से सुरक्षित और सुगम संपर्क मिल गया है।

पहले क्या था, अब क्या बदला

सड़क निर्माण से पहले ग्रामीणों के पास आवागमन का एकमात्र सहारा संकरी पगडंडियाँ ही थीं। मानसून के दिनों में ये रास्ते पूरी तरह अवरुद्ध हो जाते थे, जिससे जनजीवन ठहर सा जाता था।

  • स्वास्थ्य: अब एम्बुलेंस और शासकीय वाहन सीधे गाँव तक पहुँच रहे हैं, जिससे आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज मिलना संभव हुआ है।
  • शिक्षा: मार्ग सुगम होने से शिक्षकों और विद्यार्थियों की स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो रही है।
  • आवास और बुनियादी सुविधाएँ: प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है।

स्थानीय ग्राम पंचायत के सरपंच के अनुसार, पहले बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना या मरीजों को खाट पर लादकर ले जाना ही एकमात्र रास्ता था; सड़क बनने के बाद अब गाँव तक गाड़ियाँ आ रही हैं और जीवन बेहद आसान हो गया है।

आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था

यह सड़क केवल एक रास्ता भर नहीं है — इसने स्थानीय आदिवासी परिवारों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया आधार दिया है। उपज और वनोपज को बाजार तक पहुँचाना अब पहले से कहीं आसान है।

पीएम जनमन क्या है

प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM JANMAN) विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के गाँवों तक सड़क, आवास, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाने का केंद्र सरकार का अभियान है। अबुझमाड़ जैसे अति-दुर्गम क्षेत्रों में यह अभियान कनेक्टिविटी की सबसे बड़ी बाधा दूर कर रहा है।

महत्वपूर्ण लिंक

विवरण लिंक
आधिकारिक समाचार (जनसंपर्क संचालनालय) यहाँ देखें
नारायणपुर जिला आधिकारिक वेबसाइट narayanpur.gov.in
छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण cgrrda.nic.in

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पीएम जनमन: बुनियादी सुविधाओं का पैकेज

अबुझमाड़ जैसी जगहों में समस्या कभी एक नहीं होती — सड़क न होने का मतलब है स्कूल का अनियमित चलना, स्वास्थ्य केंद्र तक न पहुँच पाना, राशन और निर्माण सामग्री का न आना, और उपज का बाजार तक न जाना। पीएम जनमन इसी उलझी हुई कड़ी को एक साथ खोलने की कोशिश है। इसके तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की बसाहटों तक सड़क, पक्का आवास, बिजली, नल से जल, मोबाइल कनेक्टिविटी, आंगनबाड़ी, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।

झारावाही-हत्लानार सड़क इसी पैकेज की पहली कड़ी है — और यही वजह है कि सड़क बनते ही प्रधानमंत्री आवास योजना की निर्माण सामग्री, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार भी तेज हो गया।

3.2 किलोमीटर का असल मतलब

कागज पर 3.200 किलोमीटर बहुत छोटी दूरी लगती है। लेकिन जिन गाँवों के लिए यही दूरी बरसात के चार महीने पूरी तरह कट जाने का कारण बनती थी, उनके लिए यह सड़क साल भर की निरंतरता है। एम्बुलेंस का गाँव तक पहुँच पाना प्रसव, साँप के काटने या मलेरिया जैसे मामलों में जीवन और मृत्यु का अंतर बन जाता है। शिक्षकों की नियमित उपस्थिति का सीधा असर बच्चों के सीखने पर पड़ता है। यही कारण है कि दुर्गम क्षेत्रों में सड़क को अकेली सबसे बड़ी ‘विकास की चाबी’ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: सड़क कहाँ बनी है?
उत्तर: नारायणपुर जिले के अबुझमाड़ क्षेत्र में, झारावाही से हत्लानार तक।

प्रश्न: लागत और लंबाई कितनी है?
उत्तर: 3.200 किलोमीटर, स्वीकृत लागत ₹299.60 लाख, वित्तीय वर्ष 2023-24।

प्रश्न: किस एजेंसी ने बनाई?
उत्तर: छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण ने, पीएम जनमन के तहत।

प्रश्न: पीएम जनमन का पूरा नाम क्या है?
उत्तर: प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान।

बस्तर संभाग में बदलती तस्वीर

अबुझमाड़ की यह सड़क अकेली घटना नहीं है। बीते वर्षों में बस्तर संभाग के उन इलाकों में, जहाँ कभी बुनियादी निर्माण कार्य तक ठप रहते थे, सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र दोबारा खुलने की खबरें लगातार आ रही हैं। नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में यह बदलाव सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का परिणाम बताया जा रहा है।

ऐसे क्षेत्रों में एक पक्की सड़क बनने का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं रहता — उसके बाद ही राशन वितरण, टीकाकरण अभियान, बैंकिंग सुविधा और शासकीय योजनाओं का लाभ गाँव तक नियमित रूप से पहुँच पाता है। यही कारण है कि प्रशासन इन सड़कों को ‘अंतिम छोर तक पहुँच’ की कसौटी मानता है।

स्रोत: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय (dprcg.gov.in), समाचार दिनांक 13 अगस्त 2026।