देश के अलग-अलग राज्यों से आए पर्यटन प्रतिनिधियों ने बस्तर देखा — और उसे “अविस्मरणीय” बताया। छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय बाज़ार में पहचान दिलाने के लिए आयोजित बस्तर फैम टूर 10 से 14 अगस्त 2026 तक चला, जिसमें कुल 48 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें से 30 प्रतिनिधि दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर क्षेत्र के भ्रमण में शामिल हुए।
फैम टूर एक नज़र में
| आयोजन अवधि | 10 से 14 अगस्त 2026 (पाँच दिन) |
| कुल प्रतिनिधि | 48 |
| बस्तर भ्रमण में | 30 प्रतिनिधि |
| प्रमुख पड़ाव | केशकाल घाटी · चित्रकोट जलप्रपात · धुड़मारास |
| उद्देश्य | छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत से देशभर के पर्यटन प्रतिनिधियों को परिचित कराना |
फैम टूर होता क्या है
फैम टूर यानी फैमिलियराइज़ेशन टूर — इसमें ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों को किसी गंतव्य का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाता है, ताकि वे आगे चलकर अपने ग्राहकों को वह जगह सुझा सकें। यानी यह सीधे पर्यटकों के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन बेचने वालों के लिए आयोजित किया जाता है — और इसका असर लंबी अवधि में दिखता है।
केशकाल घाटी से बस्तर में प्रवेश
प्रतिनिधियों ने बस्तर के प्रवेश द्वार माने जाने वाली केशकाल घाटी से यात्रा शुरू की। घने जंगल, घुमावदार पहाड़ी मार्ग और चारों ओर फैली हरियाली — इस रास्ते ने उन्हें बस्तर के उस प्राकृतिक संसार की पहली झलक दी जहाँ जंगल, पहाड़ और घाटियाँ मिलकर पर्यटन का अनुभव रचते हैं।
चित्रकोट जलप्रपात — यात्रा का मुख्य आकर्षण
इंद्रावती नदी पर बना चित्रकोट जलप्रपात प्रतिनिधियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसके विस्तृत जलप्रवाह और आसपास के प्राकृतिक परिवेश को देखकर प्रतिनिधियों ने इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया और जलप्रपात के दृश्य कैमरे में कैद किए। बरसात के मौसम में चित्रकोट की जलधारा सबसे चौड़ी होती है — यही वह रूप है जिसने प्रतिनिधियों को सबसे अधिक प्रभावित किया।
धुड़मारास — गाँव में ठहरने का अनुभव
यात्रा का सबसे अलग हिस्सा रहा धुड़मारास — कांगेर नदी और घने जंगलों के बीच बसा गाँव, जो ग्रामीण पर्यटन की नई संभावनाओं को सामने लाता है। यहाँ प्रतिनिधियों ने जनजातीय गृह-निवास (होमस्टे) का अनुभव लिया।
- स्थानीय समुदाय द्वारा पारंपरिक तरीके से स्वागत
- मिट्टी और स्थानीय शैली से बने घरों में ठहरना
- स्थानीय व्यंजनों का स्वाद
- ग्रामीण जीवन को करीब से समझने का अवसर
प्रतिनिधियों ने धुड़मारास के स्थानीय हाट बाजार का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्हें आत्मनिर्भरता और स्थानीय संस्कृति की झलक मिली।
जंगल और जलप्रपात से आगे — लोकसंस्कृति
जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने प्रतिनिधियों को बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति से परिचित कराया। शासन की विज्ञप्ति के अनुसार प्रतिनिधियों ने महसूस किया कि बस्तर की पहचान केवल जंगलों और जलप्रपातों तक सीमित नहीं है — यहाँ की लोककलाएँ, परंपराएँ, नृत्य, संगीत और जनजातीय जीवनशैली भी पर्यटन की महत्वपूर्ण धरोहर हैं।
इसका मतलब क्या है
फैम टूर का असर तुरंत नहीं दिखता। इसका मक़सद यह है कि देश के ट्रैवल कारोबार से जुड़े लोग बस्तर को अपने पैकेज में शामिल करें। धुड़मारास जैसे गाँवों के लिए इसका सीधा अर्थ है — होमस्टे, स्थानीय भोजन और हाट बाजार से जुड़ी आय के नए रास्ते, जो गाँव में ही रहते हुए बनते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फैम टूर कब हुआ?
10 से 14 अगस्त 2026 तक।
कितने प्रतिनिधि शामिल हुए?
कुल 48, जिनमें 30 बस्तर भ्रमण में शामिल हुए।
कौन-कौन सी जगहें दिखाई गईं?
केशकाल घाटी, चित्रकोट जलप्रपात और धुड़मारास गाँव प्रमुख रहे।
धुड़मारास क्यों खास है?
कांगेर नदी और जंगलों के बीच बसा यह गाँव जनजातीय होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन के लिए उभर रहा है।
महत्वपूर्ण लिंक
| मूल विज्ञप्ति (जनसंपर्क संचालनालय) | यहाँ पढ़ें |
| जिला बस्तर (जगदलपुर) | यहाँ जाएँ |
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स्रोत: जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन — रायपुर, 16 अगस्त 2026।





