छत्तीसगढ़ की पारंपरिक चिकित्सा परंपरा को सहारा देने के लिए हीलर हर्बल गार्डन योजना की शुरुआत हो गई है। कोंडागांव में आयोजित जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन में 48 वैद्यों को अपने घर की बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने के लिए पहली किस्त का स्वीकृति पत्र सौंपा गया।
योजना एक नज़र में
| योजना का नाम | हीलर हर्बल गार्डन योजना |
| संचालन | छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड |
| शुभारंभ | बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम द्वारा |
| स्थान | दक्षिण कोंडागांव वनमंडल का काष्ठागार, कोंडागांव |
| अवसर | जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन, 13 अगस्त 2026 |
| पहली किस्त | 48 वैद्यों को स्वीकृति पत्र |
योजना में क्या मिलेगा
बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव के अनुसार इस योजना के तहत वैद्य अपनी बाड़ी में सामान्य रूप से उपयोग होने वाली वनौषधियों का छोटा उद्यान तैयार कर सकेंगे, जिसके लिए बोर्ड की ओर से आर्थिक और तकनीकी दोनों तरह का सहयोग दिया जाएगा।
- हर्बल गार्डन के लिए सहायता — बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करने हेतु किस्तों में आर्थिक सहयोग
- निःशुल्क पल्वराइजर — वैद्यों के समूहों को जड़ी-बूटियों की बेहतर प्रसंस्करण के लिए पिसाई मशीन उपलब्ध कराने की व्यवस्था
- स्कूल हर्बल गार्डन — वैद्यों के गाँवों के स्कूलों में हर्बल गार्डन विकसित करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक सहायता
- प्रमाणीकरण — प्रदेश के वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी
- पेटेंट में सहयोग — वैद्यों द्वारा तैयार औषधीय एवं पारंपरिक उपचार से जुड़े उत्पादों के पेटेंट में बोर्ड मदद करेगा
प्रमाणीकरण और पहचान पत्र क्यों मायने रखते हैं
सम्मेलन में वैद्यों ने पहचान पत्र जारी करने तथा वनौषधियों के संरक्षण में अपनी भूमिका बढ़ाने का आग्रह किया। यह माँग व्यावहारिक है — पहचान पत्र और प्रमाणीकरण से पारंपरिक चिकित्सकों को औपचारिक मान्यता मिलती है, जो अब तक अधिकतर मौखिक परंपरा और स्थानीय भरोसे पर टिकी रही है।
वैद्यों ने साझा किया पारंपरिक ज्ञान
कार्यक्रम की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। सम्मेलन में वैद्य रामप्रसाद निषाद, सुखमन मरकाम, हीरालाल मरकाम, जेठूराम प्रधान, श्रीमती चिला पोथाम और जयनाथ मरकाम सहित कई वैद्यों ने अपने पारंपरिक उपचार के अनुभव साझा किए। दक्षिण कोंडागांव वनमंडल अधिकारी श्री चूड़ामणि सिंह ने वनौषधियों के संरक्षण पर ज़ोर दिया।
कोंडागांव से शुरुआत क्यों
कोंडागांव बस्तर संभाग का वह जिला है जो शिल्प और पारंपरिक ज्ञान — दोनों के लिए जाना जाता है। यहाँ वन क्षेत्र और जनजातीय समुदायों की पारंपरिक चिकित्सा परंपरा दोनों मौजूद हैं, इसलिए वनौषधि आधारित योजना के लिए यह स्वाभाविक शुरुआती बिंदु है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
योजना का लाभ किसे मिलेगा?
पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े वैद्यों को, जो अपनी बाड़ी में औषधीय पौधों का उद्यान विकसित करना चाहते हैं।
पहली किस्त कितने वैद्यों को मिली?
कोंडागांव में आयोजित सम्मेलन में 48 वैद्यों को स्वीकृति पत्र दिए गए।
क्या केवल आर्थिक मदद मिलेगी?
नहीं। आर्थिक सहयोग के साथ तकनीकी मार्गदर्शन, समूहों को निःशुल्क पल्वराइजर और पेटेंट में सहायता भी योजना का हिस्सा है।
आवेदन कैसे करें?
शासन की विज्ञप्ति में आवेदन की अलग प्रक्रिया नहीं बताई गई है। इच्छुक वैद्य अपने जिले के वनमंडल कार्यालय या औषधि पादप बोर्ड से संपर्क कर सकते हैं। प्रक्रिया सार्वजनिक होने पर हम इस पोस्ट को अपडेट करेंगे।
महत्वपूर्ण लिंक
| मूल विज्ञप्ति (जनसंपर्क संचालनालय) | यहाँ पढ़ें |
| जिला कोंडागांव | यहाँ जाएँ |
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स्रोत: जनसंपर्क संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन — कोंडागांव, 16 अगस्त 2026।





