बीजापुर: 21 साल बाद फिर खुला मेटापारा कोरसागुड़ा का स्कूल, 25 बच्चों ने लिया प्रवेश

छत्तीसगढ़ की छात्राएं — प्रतीकात्मक चित्र

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक ऐसी खबर आई है जो आंकड़ों से कहीं बड़ी है। जिले के उसूर विकासखंड में स्थित प्राथमिक शाला मेटापारा, कोरसागुड़ा को 21 वर्षों बाद फिर से शुरू कर दिया गया है।

दो दशक से भी ज़्यादा समय तक जिस गाँव के बच्चों के पास अपने ही गाँव में पढ़ने की जगह नहीं थी, वहाँ अब फिर से घंटी बजने लगी है। स्कूल खुलने के पहले ही दिन 25 बच्चों ने प्रवेश लिया, और उनका स्वागत फूलमाला पहनाकर किया गया। बच्चों को स्लेट, पुस्तकें और पेंसिल भी वितरित की गईं — उनके शैक्षणिक जीवन की एक नई शुरुआत।

क्या हुआ — एक नज़र में

विवरण जानकारी
स्कूल प्राथमिक शाला मेटापारा, कोरसागुड़ा
विकासखंड उसूर
जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़
कितने साल बाद खुला 21 वर्ष
पहले दिन प्रवेश लेने वाले बच्चे 25
इस शिक्षा सत्र में जिले में दोबारा खुले स्कूल 38
पहल कलेक्टर बीजापुर श्री विश्वदीप

पृष्ठभूमि: बीजापुर में बंद स्कूलों को दोबारा खोलने का अभियान

यह अकेली घटना नहीं है, बल्कि एक बड़े अभियान की एक कड़ी है।

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का हिस्सा है — राज्य का वह दक्षिणी छोर जो घने जंगलों, बिखरी हुई बसाहटों और दुर्गम रास्तों के लिए जाना जाता है। यहाँ के कई गाँवों में वर्षों तक स्कूल बंद पड़े रहे और बच्चों की एक पूरी पीढ़ी औपचारिक शिक्षा से कट गई। जो बच्चे 21 साल पहले इस स्कूल में पढ़ सकते थे, वे आज खुद अभिभावक बन चुके हैं।

जनसंपर्क संचालनालय की विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार, बंद पड़े स्कूलों को फिर से शुरू कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है — और वह सफल हो रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी बीजापुर श्री राजेश पांडे ने बताया कि राज्य शासन और जिला प्रशासन के विशेष प्रयासों से वर्तमान शिक्षा सत्र में बीजापुर जिले के 38 बंद स्कूलों का पुनः संचालन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि स्थानीय संसाधनों और शिक्षादूतों की मदद से पढ़ाई शुरू कराई गई है, जिससे वर्षों से शिक्षा से दूर रहे बच्चों को फिर से विद्यालयों से जोड़ा जा रहा है।

‘शिक्षादूत’ — दुर्गम इलाकों में पढ़ाई की चाबी

इस अभियान में एक शब्द बार-बार आता है — शिक्षादूत। जहाँ नियमित शिक्षकों की पदस्थापना तत्काल संभव नहीं होती, वहाँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध शिक्षित युवाओं की मदद से कक्षाएँ शुरू कराई जाती हैं, ताकि स्कूल भवन खुलने और शिक्षक आने के बीच का समय बच्चों की पढ़ाई न खाए।

इसी तरह “स्थानीय संसाधन” का मतलब है — गाँव में उपलब्ध जगह, समुदाय का सहयोग और जिला प्रशासन की व्यवस्था, जिनके सहारे स्कूल दोबारा चालू किए जा रहे हैं।

गाँव में खुशी का माहौल

लंबे समय बाद स्कूल खुलने से ग्रामीणों और अभिभावकों में उत्साह देखा गया। अब बच्चों को अपने ही गाँव में पढ़ाई का अवसर मिल रहा है, जिससे उनकी शिक्षा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम हो गई है। दुर्गम इलाकों में यह छोटी-सी बात नहीं है — स्कूल दूर होने का सीधा मतलब होता है छोटे बच्चों, और खासकर बच्चियों, का पढ़ाई छोड़ देना।

जिला पंचायत सदस्य श्री शंकरैया माड़वी ने बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है, और स्कूलों के पुनः संचालन से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है।

एक स्कूल से ज़्यादा

जनसंपर्क संचालनालय की विज्ञप्ति इस घटना को इन शब्दों में समेटती है — मेटापारा कोरसागुड़ा स्कूल का पुनः संचालन केवल एक विद्यालय खुलने की घटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि शासन के नेतृत्व, प्रभारी मंत्री के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन की सक्रिय पहल से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुँच रही है।

21 साल एक लंबा वक्त होता है। लेकिन 25 बच्चों के लिए, जिनके हाथ में आज स्लेट और पेंसिल है, यह गिनती अब वहीं रुक गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

यह स्कूल कहाँ है?
प्राथमिक शाला मेटापारा, कोरसागुड़ा — बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड में।

कितने साल बाद खुला है?
21 वर्षों बाद।

पहले दिन कितने बच्चों ने प्रवेश लिया?
25 बच्चों ने।

बीजापुर जिले में अब तक कितने बंद स्कूल दोबारा खोले गए हैं?
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, वर्तमान शिक्षा सत्र में 38 बंद स्कूलों का पुनः संचालन किया जा चुका है।

पढ़ाई कौन करा रहा है?
स्थानीय संसाधनों और शिक्षादूतों की मदद से कक्षाएँ शुरू कराई गई हैं।


स्रोत: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय की आधिकारिक विज्ञप्ति — dprcg.gov.in