🔹 परिचय
छत्तीसगढ़ भारत का एक प्राचीन, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध राज्य है। इसकी पहचान प्राचीन मंदिरों, जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और राजनीतिक घटनाओं से बनी है। इस ब्लॉग में हम छत्तीसगढ़ के इतिहास को चार मुख्य अवधियों में समझेंगे — प्राचीन काल, मध्यकाल, ब्रिटिश काल और आधुनिक काल।
🔹 नामकरण
छत्तीसगढ़ शब्द का प्रथम प्रयोग वर्ष 1497 ई. में खैरागढ़ रियासत के राजा लक्ष्मीनिधि राय के चारण कवी दलपत राव ने किया था। रचना की पंक्ति :
लछ्मी निधि राय सुनो चित्त दे,
गढ़ छत्तीस में न गढ़ैया रही……..
लक्ष्मीनिधि खैरागढ़ के राजा थे।
छत्तीसगढ़ शब्द का द्वितीय एवं राजनितिक संदर्भो में प्रथम प्रयोग रतनपुर के राजा राजसिंहदेव ( 1689 ई. – 1712 ई. ) के दरबारी कवी गोपाल मिश्र ने अपनी रचना ‘खूब तमाशा’ में किया था। उन्होंने इस क्षेत्र को ‘छत्तीसगढ़’ नाम से सम्बोधित किया था। इसके अलावा बाबू रेवाराम ने 1896 में अपने ग्रंथ ‘विक्रमविलास’ में इस राज्य को “छत्तीसगढ़” की संज्ञा दी थी। बाबू रेवाराम नेे ही ‘तवारीख-ए-हैहैवंशीय’ एवं रतनपुर का इतिहास लिखा है।
🏛 प्राचीन काल
छत्तीसगढ़ का इतिहास तब से शुरू होता है, जब इस क्षेत्र को दक्षिण कोसल कहा जाता था।
“छत्तीसगढ़” नाम का अर्थ है छत्तीस किले, और ऐसा माना जाता है कि यह नाम रतनपुर के हैहय वंश के शासन दौरान प्रचलित हुआ।
छत्तीसगढ़ में मेघवंश ( दूसरी शताब्दी) बाणवंश, राजर्षितुल्य कुल, पर्वद्वारक वंश, नल वंश, शरभपुरी वंश, पाण्डू वंश, सोमवंश – सिरपुर, काक्तीय, वाकाटक और पाण्डू वंश – मैकल राजवंशो ने शासन किया था। कलचुरि शासन में गढ़ महत्वपूर्ण इकाई थी। छत्तीसगढ़ ३६ में विभाजित था। छत्तीसगढ़ में कलचुरियो की दो शाखाये थी।
इस काल में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में तीव्र वृद्धि हुई। वास्तुकला और मंदिरों का विकास इसी काल की बड़ी विशेषता है।
⚔️ मध्यकाल

मध्यकाल में छत्तीसगढ़ में कई रियासतों की स्थापना हुई और स्थानीय शासकों का प्रभाव बड़े पैमाने पर बढ़ा।
इस अवधि में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कलचुरी वंश की रही, जिसने रतनपुर को राजधानी बनाकर क्षेत्र पर लंबे समय तक शासन किया।
📌 मुख्य तथ्य
- शासनकाल: 9वीं शताब्दी से 18वीं शताब्दी
- प्रमुख रियासतें: सरगुजा, रायगढ़, बस्तर
- प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियाँ अपने चरम पर पहुँचीं
🇬🇧 ब्रिटिश काल
18वीं शताब्दी में मराठाओं के आक्रमण के बाद छत्तीसगढ़ पर ब्रिटिश सत्ता स्थापित हुई।
ब्रिटिशों ने छत्तीसगढ़ को सेंट्रल प्रोविंसेज़ में शामिल किया और रायपुर को मुख्यालय बनाया।
हालाँकि इस काल में सीमित विकास हुआ, लेकिन स्थानीय जनता को भारी करों, शोषण और बेगारी का सामना करना पड़ा।
इसी कारण किसानों और आदिवासी समुदायों में असंतोष बढ़ा और कई स्थानों पर विद्रोह हुए।
🇮🇳 आधुनिक काल
स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के लोगों ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
1947 में भारत की आज़ादी के बाद छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा बना रहा।
विकास में लगातार पिछड़ने के कारण अलग राज्य की मांग तेज होती गई।
📌 1 नवंबर 2000 — छत्तीसगढ़ आधिकारिक रूप से भारत का नया राज्य बना।
राज्य गठन के बाद विकास के नए अवसर मिले और आज छत्तीसगढ़ इस्पात, ऊर्जा और खनिज संसाधनों का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बन चुका है।
🌿 सांस्कृतिक विरासत
छत्तीसगढ़ की पहचान इसकी अनोखी संस्कृति में बसती है —
- प्राचीन मंदिर
- जनजातीय परंपराएँ
- लोक कला और नृत्य
- स्थापत्य शैली
इन्हीं विशेषताओं के कारण छत्तीसगढ़ भारत के सबसे विविध और समृद्ध सांस्कृतिक क्षेत्रों में शामिल है।
🔚 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का इतिहास धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक घटनाओं का विस्तृत संगम है। प्राचीन दक्षिण कोसल से लेकर आधुनिक औद्योगिक राज्य बनने तक छत्तीसगढ़ ने एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा तय की है। इसकी सांस्कृतिक विरासत, परंपराएँ और प्राचीन धरोहर आज भी इसकी अनोखी पहचान को बनाए रखती हैं।
❓ FAQs — छत्तीसगढ़ का इतिहास
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| छत्तीसगढ़ को पहले क्या कहा जाता था? | इसे प्राचीन काल में दक्षिण कोसल कहा जाता था। |
| कलचुरी वंश ने किस राजधानी से शासन किया? | रतनपुर से। |
| छत्तीसगढ़ अलग राज्य कब बना? | 1 नवंबर 2000 को। |
| आधुनिक छत्तीसगढ़ किसके लिए प्रसिद्ध है? | इस्पात, ऊर्जा उत्पादन और खनिज संसाधनों के लिए। |
| ब्रिटिश शासन छत्तीसगढ़ में कब शुरू हुआ? | 18वीं शताब्दी के बाद मराठा शासन के समाप्त होने पर। |
| छत्तीसगढ़ के गांधी | पं.सुंदरलाल शर्मा को। |




